GIMS Greater Noida Protest : ग्रेटर नोएडा के राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (जिम्स) में अपनी मांगों को लेकर हड़ताल पर बैठे आउटसोर्स कर्मचारियों का प्रदर्शन बुधवार रात हिंसक संघर्ष में तब्दील हो गया। इस संदर्भ में कासना कोतवाली में अज्ञात उपद्रवियों के खिलाफ शिकायत दर्ज की गई है। जिम्स के निदेशक का कहना है कि नोएडा के पुराने श्रमिक आंदोलनों की तरहइस स्वास्थ्य कर्मी आंदोलन में भी बाहरी हिंसात्मक तत्व शामिल हुए थे, जिन्होंने जानबूझकर स्थिति को बिगाड़ने की साजिश की। पुलिस की ताबड़तोड़ गिरफ्तारियां बुधवार रात हुई इस घटना के बाद पुलिस प्रशासन तुरंत गतिशील हो गया। बृहस्पतिवार को पुलिस ने कार्रवाई करते हुए प्रदर्शन स्थल से 53 लोगों को हिरासत में लिया। इनमें से मुख्य रूप से सात आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जिनकी पहचान अंकित सिंह, अमित भाटी, अभिषेक, हरेंद्र, विशाल, रश्मि और अंजली चौधरी के रूप में हुई है। ये सभी नोएडा, दादरी, दनकौर और बुलंदशहर के निवासी हैं। ओपीडी गेट पर धरना, रात में तोड़फोड़ निदेशक ब्रिगेडियर डॉ. राकेश गुप्ता के अनुसार, आउटसोर्स कर्मचारी 15 जून से ओपीडी के मुख्य द्वार (मरीज पंजीकरण क्षेत्र) को घेरकर धरना दे रहे थे, जिससे अस्पताल का सरकारी कार्य ठप हो गया और मरीजों को काफी दिक्कत होने लगी। जिलाधिकारी मेधा रूपम ने उनकी मांगों को शासन तक पहुंचाने का आश्वासन दिया, फिर भी कर्मी नहीं माने। बुधवार रात जब प्रबंधन ने उनसे पंजीकरण क्षेत्र को खाली करने के लिए कहा, तो प्रदर्शनकारी उग्र हो गए। उन्होंने अस्पताल के स्टाफ से दुर्व्यवहार किया और दरवाजे, खिड़कियों के शीशे तथा कीमती सरकारी फर्नीचर को क्षति पहुंचाई। भर्ती नियमों पर हड़ताल, फर्जी एमएलसी खुलासा इस विवाद की केंद्रीय वजह वर्ष 2023 से संबंधित है, जहां आउटसोर्स कर्मचारी बिना परीक्षा के सीधे नियमितीकरण की मांग पर अड़े हुए हैं, जबकि प्रबंधन का कहना है कि नियमों के अनुसार बिना परीक्षा के नियमित करने का कोई प्रावधान नहीं है। दूसरी तरफ, कासना कोतवाली प्रभारी धर्मेंद्र शुक्ल ने पुलिस पर मारपीट के आरोपों को पूरी तरह गलत बताया है। उन्होंने यह भी बताया कि जांच के दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों के मोबाइल फोन से पहले से तैयार किए गए फर्जी मेडिकल लीगल सर्टिफिकेट (एमएलसी) मिले हैं, जिससे खुद को झूठा घायल दिखाने की साजिश का संदेह उत्पन्न होता है। ये भी पढ़े : महर्षि आश्रम की जमीन पर बने फ्लैट अवैध घोषित, ट्रस्ट की संपत्ति फर्जी दस्तावेजों से बेची गई